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ग्रिड ट्रेडिंग रणनीति क्या है और इसका इस्तेमाल कैसे करें?

ग्रिड ट्रेडिंग रणनीति इस विचार पर आधारित है कि सही समय चुनने से ज़्यादा अहम सही पोज़िशनिंग रणनीति है। तो, ग्रिड ट्रेडिंग रणनीति क्या है? बुनियादी तौर पर, इसमें ऐसी तकनीकें शामिल हैं जिनमें ट्रेडर स्टॉप लॉस के बजाय तय मुनाफ़े के लक्ष्य के आधार पर, नियमित समय-अंतराल में कई सेल/बाय ऑर्डर लगाने की कोशिश करते हैं।

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जब बाज़ार की कीमत पहले से तय मुनाफ़े के लक्ष्य तक पहुँच जाती है, तो ऑर्डर बंद कर दिया जाता है। इसके बाद, पहले से तय कीमत के स्तर से नीचे या ऊपर, नए नियमित समय-अंतराल में उतनी ही संख्या में बाय और सेल ऑर्डर खोले जाते हैं। इस तरह, ट्रेडर तय कीमत के ऊपर या नीचे लगातार अपडेट होने वाले ऑर्डरों का जाल-सा बनाता है। इसका मकसद मुख्य रूप से उतार-चढ़ाव वाले बाज़ार में ट्रेडिंग करते हुए ज़्यादा मुनाफ़ा कमाना है।

ग्रिड ट्रेडिंग रणनीति का इस्तेमाल कैसे करें

यह ट्रेडिंग तकनीक तथाकथित “मीन रिवर्ज़न” अप्रोच पर आधारित है। इसी वजह से यह उतार-चढ़ाव के दौरान सबसे अच्छा काम करती है। हालांकि, स्पॉट प्राइस के रिग्रेशन के आधार पर रणनीति अलग हो सकती है। इसमें फ़्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट, परपेचुअल प्राइस आदि शामिल हो सकते हैं। ज़्यादातर मामलों में, ग्रिड रणनीति को अक्सर आर्बिट्राज से जोड़ा जाता है। कुछ ट्रेडर इन्हें एक जैसा मानते हैं, खासकर कॉइन की ट्रेडिंग के मामले में।

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क्या ग्रिड ट्रेडिंग से मुनाफ़ा होता है?

कीमत में उतार-चढ़ाव होने पर, ट्रेडर पहले से तय स्तर से ऊपर लगाए गए बाय ऑर्डरों के संकेत पहचान सकते हैं। वहीं, तय कीमत के स्तर से नीचे ट्रेड लगाए जाने पर सेल के संकेत मिलते हैं, जिससे नुकसान होता है। दूसरी ओर, जब ट्रेंड लगातार एक ही दिशा में आगे बढ़ता है, तो ट्रेडर ग्रिड रणनीति का पूरा फ़ायदा उठाकर अधिकतम मुनाफ़ा कमा सकते हैं। अगर कीमत बार-बार आगे-पीछे होती रहे (ऑसिलेट करे), तो यह तकनीक बेअसर हो सकती है या इससे और बड़ा नुकसान भी हो सकता है।

ग्रिड रणनीति इस तरह काम करती है:

  1. तय कीमत के स्तर से नीचे/ऊपर बाय/सेल ऑर्डर लगाएँ।
  2. अगर कीमत नीचे जाती है, तो यह ट्रेडर के लिए लॉन्ग जाने का संकेत है।
  3. अगर कीमत ऊपर जाती है, तो यह शॉर्ट जाने का संकेत है।
  4. जब तक कीमत में उछाल और साइडवेज़ उतार-चढ़ाव जारी रहता है, तब तक आप मुनाफ़ा कमा सकते हैं।
  5. जब कीमत साइडवेज़ चलती है, तो इससे खरीदने या बेचने के सिग्नल मिलते हैं।

ग्रिड ट्रेडिंग रणनीति की एकमात्र समस्या यह है कि इसमें जोखिम का अनुमान लगाना और, इससे भी मुश्किल, उसे नियंत्रित करना बहुत कठिन है। ट्रेडर्स को जोखिम-प्रबंधन टूल का इस्तेमाल करना चाहिए और स्टॉप लॉस ऑर्डर लगाने चाहिए, ताकि वे ज़रूरत से ज़्यादा समय तक घाटे वाली पोज़िशन होल्ड न करें।

ग्रिड ट्रेडिंग रणनीति के जोखिमों का विश्लेषण

सिद्धांत रूप में, ये तकनीकें बिल्कुल सही और निश्चित रिटर्न देने वाली रणनीति लग सकती हैं। आम तौर पर, इनका इस्तेमाल मध्यम से कम फ़्रीक्वेंसी वाले ट्रेडर्स और निवेशक करते हैं। हालांकि, इस तरह के ट्रेड में भी कुछ जोखिम होते हैं, भले ही मध्यम से कम फ़्रीक्वेंसी वाली रणनीति को कम जोखिम वाला माना जाता हो। वास्तव में, संभावित जोखिमों का पहले से अनुमान लगाना बहुत कठिन है। इनमें शामिल हैं:

  • ज़बरन लिक्विडेशन के जोखिम – ये आम तौर पर एकतरफ़ा बाज़ार में होते हैं। आर्बिट्राज के लिए हेजिंग रणनीतियों का इस्तेमाल करते समय, एक लेग विफल हो सकता है और बाज़ार में उतार-चढ़ाव बढ़ने से पैदा हुए बेकाबू जोखिमों का सामना करने के लिए आपके पास पर्याप्त धन नहीं बचता। इसका समाधान है कम लीवरेज अनुपात का इस्तेमाल करना और अन्य चालू पोज़िशन की सुरक्षा के लिए मार्जिन का उपयोग करना।
  • फ़ीस – आर्बिट्राज में ये अपरिहार्य हैं। कभी-कभी ये काफ़ी कम होती हैं। हालांकि, किसी समय आपके पास फ़ंडिंग या ट्रांज़ैक्शन फ़ीस चुकाने के लिए पर्याप्त मुनाफ़ा नहीं हो सकता। इससे बड़े ग्रिड बनना तय है।
  • फ़्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ी समस्याएँ – इसके चलते कॉन्ट्रैक्ट बंद होने से पहले सभी चालू पोज़िशन को कवर करना ज़रूरी हो जाता है।

निष्कर्ष

अन्य ट्रेडिंग तकनीकों की तुलना में ग्रिड ट्रेडिंग रणनीति में जोखिम कम दिखाई देता है और यह काफ़ी सुरक्षित लगती है। ट्रेडर्स कुछ खास टूल का इस्तेमाल करके मुनाफ़ा लॉक कर सकते हैं। मध्यम से कम फ़्रीक्वेंसी वाली रणनीतियाँ चुनने पर कम ट्रांज़ैक्शन फ़ीस का भी फ़ायदा मिल सकता है। हालांकि, ज़्यादा फ़्रीक्वेंसी वाली रणनीतियों में फ़ीस अधिक होती है और बाज़ार में उतार-चढ़ाव बढ़ने से जोखिम भी ज़्यादा होते हैं। अच्छी बात यह है कि इस रणनीति को सेट अप करना आसान है और इसके लिए तकनीकी जानकारी होना ज़रूरी नहीं है।

इस सामग्री में निवेश संबंधी सलाह, निवेश संबंधी सिफ़ारिशें, वित्तीय साधनों में किसी भी लेन-देन का प्रस्ताव या आग्रह शामिल नहीं है और इसे ऐसा नहीं समझा जाना चाहिए। कोई भी निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले, जोखिमों को समझने के लिए स्वतंत्र वित्तीय सलाहकारों से सलाह लें।