
गुरुवार की शुरुआत में जोखिम से बचने का रुझान फिर लौट आया। Fed की सख्त रुख वाली बैठक का विवरण वैश्विक आर्थिक चिंताओं में जुड़ गया, जिससे यील्ड बढ़ी और शुरुआत में अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिली। इससे डॉलर महीने के उच्च स्तर पर पहुँच गया। इसके साथ ही, ऑस्ट्रेलिया के कमजोर रोज़गार आंकड़ों ने AUDUSD में मंदी के रुझान को नवंबर 2022 के बाद के सबसे निचले स्तर की ओर बढ़ाया।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पेयर के साथ-साथ NZDUSD ने भी 2023 का नया निचला स्तर बनाया, जबकि अन्य प्रमुख करेंसी में खास हलचल नहीं हुई। ध्यान देने वाली बात है कि चीन से जुड़ी चिंताओं से युआन की कीमतों को बढ़ावा मिल रहा है, जबकि क्रूड ऑयल और गोल्ड में हाल ही में रिकवरी आई है।
दूसरी ओर, एशिया-प्रशांत के शेयरों में कमज़ोरी बनी हुई है, जबकि हाल के कंसोलिडेशन से पहले अमेरिकी और यूरोपीय स्टॉक फ़्यूचर्स महीने के नए निचले स्तर पर पहुंच गए।
क्रिप्टोकरेंसी की बात करें, तो व्यापक जोखिम-विमुखता और इस उद्योग की निराशावादी धारणा मिलकर BTCUSD और ETHUSD को दो महीने के नए निचले स्तर तक धकेल सकती हैं।
प्रमुख एसेट्स में हालिया उतार-चढ़ाव इस प्रकार हैं:



बुधवार को जारी FOMC मिनट्स से पता चला कि नीति-निर्माताओं को महंगाई के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की चिंता है। उन्होंने ज़रूरत पड़ने पर ब्याज दरें बढ़ाने की तैयारी भी दिखाई। इससे यह निराशावाद फिर बढ़ा कि आर्थिक सुधार अभी नाज़ुक है और जोखिम में पड़ सकता है। इसके अलावा, चीन और रूस से जुड़ी भू-राजनीतिक चिंताओं, मंदी की आशंकाओं पर काबू पाने की बीजिंग की जद्दोजहद और Fitch के कमजोर आर्थिक अनुमानों ने भी बाज़ार के सेंटीमेंट पर दबाव डाला।
हालांकि, यूरोपीय सत्र के दौरान बड़े डेटा या घटनाओं की कमी से ट्रेडर्स को राहत की सांस लेने का मौका मिलता है और यह उत्तर अमेरिकी सत्र के दौरान संभावित जोखिम-विमुखता की तैयारी का संकेत देता है।
दूसरी ओर, क्रिप्टो ETF को लेकर अनिश्चितता और इंडस्ट्री के बड़े खिलाड़ियों की अमेरिकी SEC के साथ लड़ाई के साथ-साथ, व्यापक रूप से मज़बूत अमेरिकी डॉलर BTCUSD और ETHUSD पर दबाव डाल रहा है।
हालाँकि, दूसरे दर्जे के गतिविधि और रोज़गार के आँकड़े अमेरिकी आर्थिक कैलेंडर में शामिल होंगे और Fed Minutes के आक्रामक रुख को देखते हुए अहम हैं, फिर भी अमेरिकी ट्रेज़री बॉन्ड यील्ड और जोखिम से जुड़ी ख़बरों पर सबसे ज़्यादा ध्यान रहेगा। इसकी वजह पिछले साल का वह अनुभव हो सकता है, जब बॉन्ड कूपन 4.30% से ऊपर चले गए थे और वैश्विक मंदी की आशंकाएँ बढ़ गई थीं। ऐसा ही माहौल अमेरिकी डॉलर को मज़बूती दे सकता है और सोने, AUDUSD तथा शेयरों की कीमतों को नीचे खींच सकता है।
आपकी ट्रेडिंग किस्मत आपका साथ दे!