लॉग आउट
Are you sure you want to exist?

फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग में पिवट पॉइंट रणनीति का इस्तेमाल कैसे करें

हर ट्रेडर को पता होना चाहिए कि पिवट पॉइंट क्या होता है। टेक्निकल एनालिसिस और अलग-अलग ट्रेडिंग चार्ट इस्तेमाल करते समय, यह कई बुनियादी रणनीतियों का मुख्य हिस्सा होता है। आम तौर पर, कमोडिटी या इक्विटी में ट्रेड करने वाले लोग पिवट पॉइंट रणनीति का इस्तेमाल करते हैं, जिससे सपोर्ट और रेज़िस्टेंस के स्तरों का सटीक अनुमान लगाया जा सकता है। इससे संभावित रूप से सफल एंट्री पॉइंट पहचानने में मदद मिलती है। ट्रेडर पिवट पॉइंट ट्रेडिंग के नियमों का इस्तेमाल स्टॉप लॉस या लिमिट ऑर्डर सेट करने के लिए भी करते हैं।

None

हालांकि, बहुत कम शुरुआती ट्रेडर समझते हैं कि पिवट पॉइंट क्या होता है और किसी खास ट्रेडिंग रणनीति के साथ वास्तविक बाज़ार की स्थितियों में इसका इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है।

पिवट पॉइंट की व्याख्या

इतने सारे टेक्निकल इंडिकेटर में, पिवट पॉइंट शायद सबसे अहम है, क्योंकि इससे भविष्य के ट्रेंड या कीमत की चाल का पता लगाने में मदद मिलती है। इसके अलावा, यह दिखाता है कि बाज़ार ओवरबॉट या ओवरसोल्ड स्थिति में है या नहीं। यह इंडिकेटर ट्रेंड के साथ-साथ सपोर्ट और रेज़िस्टेंस के स्तरों को पहचानना भी आसान बनाता है।

MT4 चार्ट पर पिवट पॉइंट का उदाहरण देखें (पतली क्षैतिज रेखाएँ):

None

इंडस्ट्री की बेहतरीन ट्रेडिंग कंडीशन
डिपॉज़िट बोनस
200% तक डिपॉज़िट बोनस 
200% तक
स्प्रेड
0 पिप से स्प्रेड 
0 पिप से
अवॉर्ड की गई कॉपी
ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म अवॉर्ड की गई कॉपी
ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म
तुरंत जुड़ें

पिवट पॉइंट ट्रेडिंग के नियमों का इस्तेमाल और उनकी व्याख्या करने के तरीके

जैसा कि पहले बताया गया है, इस तकनीकी इंडिकेटर का उपयोग मुख्य सपोर्ट और रेज़िस्टेंस स्तरों की पहचान और गणना करने के लिए किया जाता है। दूसरे शब्दों में, इसकी मदद से आप देख सकते हैं कि दिए गए प्राइस स्तर पर सबसे बड़ा मूवमेंट कब होने वाला है। बेशक, पिवट पॉइंट्स का इस्तेमाल अन्य सपोर्ट और रेज़िस्टेंस स्तरों के लिए भी किया जा सकता है। हालांकि, वे मुख्य स्तरों जितने प्रभावशाली और जानकारीपूर्ण नहीं होते। दूसरी ओर, वे प्राइस के कुछ खास मूवमेंट्स को पहचानने में भी मदद करते हैं।

ट्रेडर पिवट पॉइंट ट्रेडिंग नियमों का इस्तेमाल दो तरीकों से कर सकते हैं:

  1. बाज़ार का कुल ट्रेंड पहचानना। यह तरीका बुल और बेयर, दोनों तरह के ट्रेडर्स के लिए काम करता है। अगर कीमत इंडिकेटर के नीचे गिरती दिखे, तो यह बेयरिश सिग्नल है। अगर कीमत ऊपर की ओर बढ़ते हुए इंडिकेटर को पार करे, तो यह बुलिश सिग्नल है।
  2. बाज़ार में एंट्री और एग्ज़िट के स्तर तय करना। मान लीजिए, कीमत रेज़िस्टेंस स्तर को तोड़कर उसके ऊपर जाने पर आप 1,000 शेयर खरीदने के लिए लिमिट ऑर्डर लगाते हैं। साथ ही, आप सपोर्ट स्तर के पास स्टॉप लॉस भी लगा सकते हैं।

जैसा कि आप देख सकते हैं, पिवट पॉइंट ट्रेडिंग नियमों की मदद से सपोर्ट और रेज़िस्टेंस के आधार पर सटीक अनुमान लगाना आसान हो जाता है। दूसरी ओर, कभी-कभी इन स्तरों का कोई खास प्रभाव नहीं होता। हमारा मतलब है कि आपको सिर्फ़ तकनीकी इंडिकेटर पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। इसे एक व्यापक ट्रेडिंग तरीके के तहत दूसरे टूल्स और ट्रेडिंग इंस्ट्रूमेंट्स के साथ इस्तेमाल करना चाहिए।

पिवट पॉइंट्स का इस्तेमाल दूसरे तकनीकी इंडिकेटर्स के साथ करना बेहतर है, जैसे MACD, मूविंग एवरेज, कैंडलस्टिक्स और कुछ अन्य इंडिकेटर्स।

यहां आप अपने डिवाइस के लिए MT4 ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म चुन सकते हैं और उसे मुफ़्त में तुरंत इंस्टॉल कर सकते हैं। इसके लिए बस एक आसान रजिस्ट्रेशन फ़ॉर्म भरना होगा। MetaTrader 4 में इंडिकेटर्स और प्लगइन्स इंस्टॉल किए जा सकते हैं। इसका एक ऐसा वर्ज़न भी उपलब्ध है, जिसे इंस्टॉल करने की ज़रूरत नहीं होती।

फ़ॉरेक्स बाज़ार में पिवट पॉइंट ट्रेडिंग नियमों का इस्तेमाल

फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग में बेहतर फ़ैसले लेने के लिए अनुभवी ट्रेडर अक्सर पिवट पॉइंट्स के साथ तकनीकी इंडिकेटर्स, ऑसिलेटर्स और फ़ंडामेंटल्स का इस्तेमाल करते हैं। फ़ॉरेक्स बाज़ार में ट्रेडिंग शुरू करने से पहले आपको कुछ बुनियादी दिशा-निर्देशों और बातों की जानकारी होनी चाहिए:

  • बुलिश रुझान – जब एसेट की कीमत पिवट पॉइंट से ऊपर हो;
  • बेयरिश रुझान – जब एसेट की कीमत पिवट पॉइंट से नीचे हो।
  • आप जितनी लंबी अवधि का पिवट पॉइंट इस्तेमाल करते हैं, इंडिकेटर उतना ही भरोसेमंद होता है, क्योंकि समय के साथ डेटा सेट भी बढ़ता जाता है;
  • पिवट पॉइंट्स में सपोर्ट और रेज़िस्टेंस को एक्सटेंशन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। मूवमेंट का अनुमान लगाते समय ये अहम प्राइस स्तर भी हो सकते हैं।

पिवट पॉइंट ट्रेडिंग रणनीतियों के प्रकार

आपकी ट्रेडिंग शैली के अनुसार तकनीकी इंडिकेटर्स को अलग-अलग ट्रेडिंग तकनीकों में इस्तेमाल किया जा सकता है। यहां हम पिवट पॉइंट पर आधारित दो मुख्य ट्रेडिंग रणनीतियों की समीक्षा करेंगे:

  1. स्विंग ट्रेडिंग – यह उन लोगों के लिए है जो मध्यम और लंबी अवधि के ट्रेड करते हैं। अगर आप पिवट पॉइंट्स का इस्तेमाल करने का फ़ैसला करते हैं, तो आपको साप्ताहिक या मासिक अवधि को ध्यान में रखना होगा।
  2. ब्रेकआउट ट्रेडिंग – यह उन ट्रेडर्स के लिए है जो ज़्यादा वोलैटिलिटी वाले टाइमफ़्रेम में ट्रेड करते हैं। वे बड़े मूवमेंट्स और प्राइस में बदलाव का इंतज़ार करते हैं।

निष्कर्ष

सपोर्ट और रेज़िस्टेंस स्तरों का इस्तेमाल करते समय पिवट पॉइंट रणनीति एक मज़बूत बढ़त देती है। आप खुद को बुल मानें या बेयर, इस इंडिकेटर का कई तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है। आसान गणनाओं से ट्रेंड को समझना और बाज़ार की स्थितियों को पहचानना आसान हो जाता है। इससे आप लिमिट ऑर्डर और स्टॉप लॉस सेट कर सकते हैं या बाज़ार में एंट्री और एग्ज़िट के स्तर तय कर सकते हैं। इस रणनीति का पूरा फ़ायदा उठाने के लिए, पिवट पॉइंट्स का इस्तेमाल दूसरे इंडिकेटर्स और टूल्स के साथ करें।

इस सामग्री में निवेश संबंधी सलाह, निवेश संबंधी सिफ़ारिशें, वित्तीय साधनों में किसी भी लेन-देन का प्रस्ताव या आग्रह शामिल नहीं है और इसे ऐसा नहीं समझा जाना चाहिए। कोई भी निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले, जोखिमों को समझने के लिए स्वतंत्र वित्तीय सलाहकारों से सलाह लें।