फ़ॉरेक्स हेजिंग में एक साथ कई पोज़िशन खोलने का तरीका अपनाया जाता है। ट्रेडर इस तकनीक का इस्तेमाल फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग के जोखिम को कम करने के लिए करते हैं, क्योंकि FX मार्केट पर अक्सर कई प्रतिकूल परिस्थितियों का असर पड़ता है, खासकर बाज़ार में अनिश्चितता के दौरान।

इसीलिए निवेशक संभावित जोखिम को कम करने के लिए अतिरिक्त एसेट खरीदकर या बेचकर खुली पोज़िशन को सुरक्षित रखने के दूसरे तरीकों की तलाश करते हैं। इस लेख में हम बताएँगे कि फ़ॉरेक्स हेजिंग कैसे काम करती है। साथ ही, हम कुछ प्रमुख FX हेजिंग रणनीतियों पर भी नज़र डालेंगे।
फ़ॉरेक्स हेजिंग की किसी भी रणनीति में मौजूदा ट्रेंड की दिशा के विपरीत एक या कई पोज़िशन खोलना शामिल है। इससे ट्रेडर्स नेट-ज़ीरो बैलेंस हासिल कर सकते हैं या उसके जितना संभव हो सके उतना करीब पहुँच सकते हैं। आम तौर पर, ज़्यादातर निवेशक पोज़िशन बंद करके अधिक अनुकूल परिस्थितियों में बाज़ार में दोबारा प्रवेश करना पसंद करेंगे। फ़ॉरेक्स हेजिंग से पहली पोज़िशन खुली रखते हुए एक और ट्रेड करना संभव हो जाता है।
आसान शब्दों में, इस तरीके से किसी करेंसी पेयर की खुली पोज़िशन को बाज़ार की संभावित प्रतिकूल चालों से सुरक्षित रखा जा सकता है। ट्रेडर्स को हमेशा उन अलग-अलग घटनाओं और खबरों पर नज़र रखनी चाहिए, जिनसे FX में बहुत ज़्यादा उतार-चढ़ाव हो सकता है। इस जानकारी के आधार पर प्रभावी, अल्पकालिक सुरक्षा तैयार की जा सकती है।



फ़ॉरेक्स हेजिंग के दो मिलते-जुलते तरीके हैं:
जोखिम प्रबंधन के लिहाज़ से पहला तरीका ज़्यादा लचीला और इसके नतीजों का अनुमान लगाना आसान लगता है। बाज़ार की चाल आपके विपरीत होने पर यह बेहतर सुरक्षा साबित हुआ है।
आइए, फ़ॉरेक्स हेजिंग के प्रकारों और उनके काम करने के तरीके पर करीब से नज़र डालें। हम सभी प्रमुख FX हेजिंग रणनीतियों को दो मुख्य श्रेणियों में बाँट सकते हैं।
ऑनलाइन फ़ॉरेक्स ब्रोकर के आधार पर, ट्रेडर्स को डायरेक्ट हेज ट्रांज़ैक्शन करने का विकल्प मिल सकता है। इसका मतलब है कि आप एक ही एसेट, जैसे USD/GBP, में कई ट्रेड कर सकते हैं। इसके अलावा, संभव है कि आप एक ही समय में इसी करेंसी पेयर में शॉर्ट पोज़िशन भी खोल सकें।
इसके परिणामस्वरूप आपका नेट प्रॉफ़िट शून्य होगा। हालांकि, अगर आपके पास FX बाज़ार में सही समय पर ट्रेड करने के टूल हैं, तो आप अतिरिक्त जोखिम लिए बिना कुछ प्रॉफ़िट कमा सकते हैं।
इस जटिल तरीके में ऐसे दो एसेट चुनने होते हैं, जिनका आपसी संबंध सबसे अनुकूल हो। उदाहरण के लिए, EUR/USD और GBP/USD जैसे प्रमुख करेंसी पेयर का संयोजन अच्छा हो सकता है। इसके बाद, दोनों करेंसी पेयर में विपरीत दिशाओं में पोज़िशन लें। अगर इनमें से किसी एक करेंसी की कीमत गिरती है, तो आप शॉर्ट पोज़िशन से नुकसान की भरपाई कर सकते हैं।
यहाँ सबसे चुनौतीपूर्ण काम पोज़िशन को सही समय पर बंद करना है, चाहे आप डायरेक्ट या कॉम्प्लेक्स फ़ॉरेक्स हेजिंग रणनीति अपनाएँ। अगर आप पहली पोज़िशन खुली रखने का फ़ैसला करते हैं, तो आपको दूसरी पोज़िशन बंद करनी होगी। अगर आप हेज की दोनों पोज़िशन बंद करना चाहते हैं, तो दोनों को एक साथ बंद करना ज़रूरी है। ऐसा न करने पर अचानक आए गैप की वजह से आपको नुकसान हो सकता है।
इसलिए, रणनीति को सही तरीके से लागू करने के लिए आपको पोज़िशन बंद करने का सही समय चुनना होगा। अगर कोई ट्रेडर अपनी किसी खुली पोज़िशन पर ध्यान नहीं देता, तो फॉरेक्स हेजिंग की पूरी रणनीति विफल हो सकती है।
अब, आइए कुछ सबसे लोकप्रिय FX हेजिंग रणनीतियों पर नज़र डालें। हम निवेशकों के बीच लोकप्रिय 3 मुख्य विकल्पों पर चर्चा करेंगे:
फॉरेक्स हेजिंग का इस्तेमाल मुख्य रूप से खरीदार और विक्रेता के बीच हुए समझौते में एसेट की कीमत तय करने के लिए किया जाता है। इससे ट्रेडर्स को बाज़ार की विपरीत दिशा में होने वाली हलचल से बचाव में मदद मिलती है। बाज़ार के प्रतिभागी कई FX रणनीतियों और तरीकों में से चुन सकते हैं। इनमें खरीदने और बेचने की तय बाध्यताएँ हो सकती हैं या कम बाध्यकारी शर्तें हो सकती हैं, जिनके तहत कॉन्ट्रैक्ट में बदलाव किया जा सकता है।
इस तरीके का मुख्य फ़ायदा यह है कि इससे आर्थिक मंदी से बचाव करने या मंदी के बाज़ार में टिके रहने में मदद मिल सकती है।
इस सामग्री में निवेश संबंधी सलाह, निवेश संबंधी सिफ़ारिशें, वित्तीय साधनों में किसी भी लेन-देन का प्रस्ताव या आग्रह शामिल नहीं है और इसे ऐसा नहीं समझा जाना चाहिए। कोई भी निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले, जोखिमों को समझने के लिए स्वतंत्र वित्तीय सलाहकारों से सलाह लें।