फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग में, विनिमय दर के कोटेशन दो अलग-अलग तरीकों से दिए जा सकते हैं। ये प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कोटेशन होते हैं।

डायरेक्ट कोटेशन आम तौर पर तब इस्तेमाल किया जाता है, जब विदेशी करेंसी की 1 यूनिट की वैल्यू घरेलू करेंसी की यूनिट में बताई जाती है। इसके उलट, इनडायरेक्ट कोटेशन में घरेलू करेंसी की 1 यूनिट की वैल्यू विदेशी करेंसी में बताई जाती है।
इस लेख में, हम बताएंगे कि फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग में डायरेक्ट और इनडायरेक्ट कोटेशन कैसे काम करते हैं और आसान फ़ॉर्मूले से उनकी गणना कैसे की जाती है।
जैसा कि पहले बताया गया है, करेंसी की विनिमय दर को दो अलग-अलग तरीकों से दर्शाया जा सकता है। इनडायरेक्ट कोटेशन का इस्तेमाल करते समय, हम विदेशी करेंसी की विनिमय दर को स्थिर मानते हैं, जबकि घरेलू करेंसी उस देश और स्थान के आधार पर बदल सकती है जहां एक्सचेंज किया जाता है।
डायरेक्ट कोटेशन को समझना उपभोक्ताओं और शुरुआती ट्रेडर्स के लिए आसान है। इससे पता चलता है कि पेग की गई विदेशी करेंसी में बदलने के लिए कितनी घरेलू करेंसी की ज़रूरत होगी। अगर कन्वर्ज़न रेट कम है, तो विदेशी परिसंपत्ति के मुकाबले स्थानीय करेंसी की वैल्यू बढ़ रही है। अगर विनिमय दर ज़्यादा है, तो फ़ॉरेक्स मार्केट में स्थानीय करेंसी की वैल्यू घट रही है।



डायरेक्ट कोटेशन की गणना करने के लिए, घरेलू करेंसी की राशि को विदेशी करेंसी की राशि से भाग दें। इससे आपको विदेशी करेंसी की 1 यूनिट खरीदने के लिए ज़रूरी स्थानीय करेंसी की राशि मिलेगी।

विदेशी करेंसी की विनिमय दरें बताने के लिए डायरेक्ट कोटेशन सबसे लोकप्रिय और आसान तरीका है। हालांकि, इसका इस्तेमाल आम तौर पर तब किया जाता है जब बेस परिसंपत्ति की वैल्यू काउंटर परिसंपत्ति से ज़्यादा होती है।
उदाहरण के लिए, किसी समय 1 USD खरीदने के लिए आपको 72 रुपये (INR) की ज़रूरत होगी। यह डायरेक्ट कोटेशन का उदाहरण है, क्योंकि अमेरिकी डॉलर स्थिर करेंसी है, जबकि INR बदलने वाली करेंसी है। इसलिए, USD बेस परिसंपत्ति है, क्योंकि इसकी वैल्यू काउंटर करेंसी (INR) से ज़्यादा है।
ये दोनों अवधारणाएं मूल रूप से एक ही उद्देश्य पूरा करती हैं। हालांकि, अवधारणा के स्तर पर इनमें ये अंतर हैं:
ज़्यादातर ट्रेडर्स प्रत्यक्ष कोटेशन पद्धति का इस्तेमाल करते हैं। करेंसी की कीमत पता करने का यह एक आसान तरीका है। इसके अलावा, इसके कुछ ऐसे अतिरिक्त फ़ायदे भी हैं जो आपको उपयोगी लग सकते हैं:
ऊपर बताई गई बातों को देखते हुए, ज़्यादातर ट्रेडर्स प्रत्यक्ष कोटेशन का इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि इन्हें पढ़ना और समझना आसान है। यह ख़ास तौर पर फ़ॉरेक्स ट्रेडिंग में नए लोगों के लिए उपयोगी है। इस तरीके से वे अलग-अलग करेंसी के एक्सचेंज रेट और विभिन्न देशों की कुल आर्थिक स्थिति को आसानी से समझ सकते हैं। पूरी तस्वीर देखने के लिए, आपको कभी-कभी मौजूदा एक्सचेंज रेट की तुलना ऐतिहासिक डेटा से करनी पड़ सकती है।
जैसा कि हम जानते हैं, फ़ॉरेक्स मार्केट अनियमित और विकेंद्रीकृत है। तो, एक्सचेंज रेट वास्तव में कौन तय करता है? ब्रोकर औरट्रेडर्स को कोटेशन कहाँ से मिलते हैं? यह करेंसी की कीमत को प्रभावित करने वाले कारकों पर निर्भर करता है, जैसे सप्लाई और डिमांड, भू-राजनीतिक स्थिति, ख़बरें और कई अन्य बातें। इसके अलावा,एक्सचेंज रेट में हर समय उतार-चढ़ाव होता रहता है।
साथ ही, एक्सचेंज रेट इस बात पर भी निर्भर करते हैं कि ट्रेडर्स एक करेंसी को दूसरी करेंसी के मुकाबले किस रेट पर खरीदने के लिए तैयार हैं। इसी तरह, सेलिंग रेट इस बात पर निर्भर करता है कि ट्रेडर्स किसी खास रेट पर उपलब्ध करेंसी बेचने के लिए कितने तैयार हैं।
एक्सचेंज रेट में हर समय बदलाव होता रहता है। वे कभी एक जैसे नहीं रहते। किसी करेंसी पेयर में कम-से-कम एक करेंसी की कीमत समय-समय पर बदलती रहती है। इसे हम “उतार-चढ़ाव” कहते हैं। सप्लाई और डिमांड जैसे अहम कारकों के कारण, कभी ऊँची कीमत वाला एसेट भी अचानक अपना मूल्य खो सकता है।
इस सामग्री में निवेश संबंधी सलाह, निवेश संबंधी सिफ़ारिशें, वित्तीय साधनों में किसी भी लेन-देन का प्रस्ताव या आग्रह शामिल नहीं है और इसे ऐसा नहीं समझा जाना चाहिए। कोई भी निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले, जोखिमों को समझने के लिए स्वतंत्र वित्तीय सलाहकारों से सलाह लें।